
जमशेदपुर की बेटी की कलम से प्रेम, विरह और खुद तक लौटने की कहानी


डॉ. अस्मिता मोहंती की पुस्तक ‘Of Love and Silent Wars’ ने स्थानीय स्मृतियों से निकलकर बनाई राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान



जमशेदपुर। किसी शहर से अपना रिश्ता सिर्फ वहां रहने भर का नहीं होता। कुछ शहर हमारी पहचान का हिस्सा बन जाते हैं। उनकी गलियां, उनकी शामें, उनके मौसम, उनके कुछ खास कोने और उनसे जुड़ी स्मृतियां वर्षों बाद भी हमारे भीतर जीवित रहती हैं। जमशेदपुर डॉ. अस्मिता मोहंती के लिए ऐसा ही शहर है।
जमशेदपुर में जन्मीं और पली-बढ़ीं डॉ. अस्मिता मोहंती आज भुवनेश्वर में रहकर अपने पेशेवर जीवन के साथ साहित्य की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बना रही हैं। लेकिन उनके लिए जमशेदपुर सिर्फ उनका जन्मस्थान नहीं, बल्कि उनकी जड़ों का शहर है। वे खुद को गर्व से “जमशेदपुर की बेटी” कहती हैं। यही वजह है कि उनकी नई पुस्तक Of Love and Silent Wars: The Way Back to Me Through Him उनके लिए सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक भावनात्मक माध्यम भी है।
डॉ. अस्मिता मोहंती, श्री अटल मोहंती और श्रीमती कल्पना मोहंती की बेटी हैं। जमशेदपुर के कदमा में उनका बचपन बीता। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केरला समाजम मॉडल स्कूल, जमशेदपुर से पूरी की। अपने जीवन में आगे बढ़ने के पीछे वे अपने परिवार के साथ-साथ अपने शिक्षकों और उस शहर को भी महत्वपूर्ण मानती हैं, जिसने उनके व्यक्तित्व की नींव तैयार की।
आज उनकी पुस्तक Of Love and Silent Wars देश की सीमाओं से आगे वैश्विक पाठकों तक पहुंच चुकी है। पुस्तक का Amazon पर आधिकारिक लॉन्च हो चुका है और यह Amazon सहित विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों में पाठकों के लिए उपलब्ध है। पुस्तक को पाठकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसकी कहानी तथा भावनात्मक प्रस्तुति पाठकों के बीच अपनी जगह बना रही है।
प्रेम की कहानी से आगे की कहानी
Of Love and Silent Wars पहली नजर में प्रेम और रिश्तों की कहानी लग सकती है, लेकिन इसके भीतर की यात्रा इससे कहीं ज्यादा गहरी है। यह प्रेम के साथ-साथ टूटन, प्रतीक्षा, भावनात्मक संघर्ष, आत्मसम्मान और अंततः स्वयं को फिर से खोजने की कहानी है।
पुस्तक की केंद्रीय पात्र अनामी के माध्यम से लेखिका उस मनःस्थिति को सामने लाती हैं, जिससे गुजरते हुए इंसान किसी रिश्ते में खुद को खो देता है और फिर एक दिन उसे एहसास होता है कि सबसे जरूरी यात्रा किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचने की नहीं, बल्कि खुद तक वापस लौटने की है।
यही भाव पुस्तक के शीर्षक The Way Back to Me Through Him में भी दिखाई देता है।
लेखिका के लिए प्रेम केवल किसी व्यक्ति को पाने का नाम नहीं है। प्रेम के साथ जुड़ी खामोशियां, अधूरे सवाल, अनकहे शब्द, इंतजार और उन रिश्तों की यादें, जो खत्म होने के बाद भी मन में कहीं जीवित रहती हैं, उनकी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इसीलिए पुस्तक का ‘Silent Wars’ केवल एक साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि उन आंतरिक संघर्षों का प्रतीक है जिन्हें इंसान अक्सर दुनिया से छिपाकर अपने भीतर लड़ता है।
जमशेदपुर की स्मृतियां भी कहानी का हिस्सा
इस पुस्तक को डॉ. अस्मिता के लिए विशेष बनाने वाली एक और बात है इसमें शामिल जमशेदपुर से जुड़े संदर्भ।
शहर की स्मृतियां और उससे जुड़े कुछ स्थान पुस्तक की कहानी में दिखाई देते हैं। यह उनके लिए बेहद खास है, क्योंकि जीवन उन्हें जमशेदपुर से भुवनेश्वर ले आया, लेकिन उनकी जड़ें आज भी उसी शहर में हैं।
उनका मानना है कि किसी लेखक के लिए उसकी जड़ें उसकी रचनात्मक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। इसलिए जब उनकी कहानी राष्ट्रीय और अब वैश्विक पाठकों तक पहुंच रही है, तब भी उसमें जमशेदपुर की स्मृतियों का होना उन्हें अपनी जमीन से जोड़े रखता है।
एक तरफ पुस्तक प्रेम, रिश्तों और आत्मखोज जैसे सार्वभौमिक भावों को लेकर देश-दुनिया के पाठकों तक पहुंच रही है, तो दूसरी तरफ उसमें जमशेदपुर की झलक उस शहर से उनके व्यक्तिगत जुड़ाव को भी जीवित रखती है।
यही स्थानीय और सार्वभौमिक भावनाओं का मेल इस पुस्तक को लेखिका के लिए और अधिक व्यक्तिगत बनाता है।
कविता से उपन्यास तक का सफर
डॉ. अस्मिता मोहंती साहित्य की दुनिया में नई नहीं हैं। वे कवयित्री भी हैं और इससे पहले उनकी कविता-पुस्तक The Endless Moonlight को पाठकों का स्नेह मिल चुका है।
कविता से उपन्यास तक का उनका सफर उनके लेखन के विस्तार को दर्शाता है। जहां कविता में भावनाओं को कुछ पंक्तियों में समेटने की चुनौती होती है, वहीं उपन्यास ने उन्हें पात्रों और परिस्थितियों के माध्यम से उन भावनाओं को विस्तार देने का अवसर दिया।
उनका पेशेवर जीवन भी साहित्य से अलग नहीं है। वे HR प्रोफेशनल के रूप में काम करती हैं और लोगों, उनके व्यवहार, रिश्तों और भावनात्मक जटिलताओं को करीब से देखने का अनुभव रखती हैं। शायद यही कारण है कि उनके लेखन में रिश्तों की भावनात्मक परतें प्रमुखता से दिखाई देती हैं।
“कभी-कभी वापस खुद तक आना जरूरी होता है”
डॉ. अस्मिता की पुस्तक का मूल संदेश किसी एक प्रेम कहानी तक सीमित नहीं है। यह उन सभी लोगों से संवाद करती है, जिन्होंने कभी किसी रिश्ते में खुद को खोया हो, किसी अधूरे संबंध को अपने भीतर ढोया हो या किसी मोड़ पर खुद से यह सवाल किया हो कि आखिर उनकी अपनी पहचान क्या है।
पुस्तक पाठक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि किसी रिश्ते का अंत हमेशा किसी कहानी का अंत नहीं होता। कई बार वहीं से स्वयं को समझने और अपने अस्तित्व को फिर से स्वीकार करने की शुरुआत होती है।
यही कारण है कि Of Love and Silent Wars केवल रोमांटिक फिक्शन के पाठकों तक सीमित नहीं रहना चाहती। यह उन पाठकों के लिए भी है जिन्होंने प्रेम किया है, खोया है, इंतजार किया है, टूटे हैं और फिर अपने भीतर से खुद को समेटकर आगे बढ़े हैं।
जमशेदपुर से दुनिया तक
डॉ. अस्मिता मोहंती के लिए इस पूरी यात्रा में सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि जिस शहर में उन्होंने जन्म लिया, वहीं से उनकी जीवन-यात्रा शुरू हुई और आज उनकी लिखी कहानी देश की सीमाओं को पार कर दुनिया के पाठकों तक पहुंच रही है।
भुवनेश्वर आज उनका वर्तमान शहर है, लेकिन जमशेदपुर उनकी जड़ों में है।
उनकी पुस्तक में जमशेदपुर की मौजूदगी इस बात की याद दिलाती है कि व्यक्ति चाहे कितनी भी दूर चला जाए, उसकी शुरुआत उसके भीतर बनी रहती है। शायद इसलिए डॉ. अस्मिता के लिए यह पुस्तक एक साहित्यिक उपलब्धि के साथ-साथ अपने शहर को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने की यात्रा भी है।
आज Of Love and Silent Wars Amazon पर लॉन्च हो चुकी है और दुनिया भर में विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध है। पाठकों से मिल रही प्रतिक्रियाएं लेखिका के लिए इस यात्रा को और खास बना रही हैं।
एक समय जमशेदपुर की गलियों में अपने सपनों को आकार देने वाली यह बेटी आज अपनी कलम के जरिए उन सपनों को दुनिया तक पहुंचा रही है।
और शायद यही किसी शहर की सबसे खूबसूरत उपलब्धि होती है कि उसकी बेटी जहां भी जाए, उसकी पहचान में उस शहर की मिट्टी की एक खुशबू बनी रहे।
डॉ. अस्मिता मोहंती की ‘Of Love and Silent Wars’ अब Amazon सहित विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

