
कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा के सप्तम दीक्षांत समारोह में राजनगर प्रखंड के डॉ. सुभाष चन्द्र महतो को झारखण्ड के महामहिम राज्यपाल सह झारखण्ड के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री संतोष कुमार गंगवार ने पीएच.डी.(Ph.D.) उपाधि प्रमाण पत्र देकर किया सम्मानित।
डॉ. सुभाष चन्द्र महतो कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के मानविकी संकाय अंतर्गत जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में कुड़माली भाषा साहित्य के क्षेत्र में अपना शोध कार्य पूर्ण किया है। दिसंबर 2025 में इनका खुली मौखिक परीक्षा संपन्न हुई तत्पश्चात् जनवरी 2026 में ही इन्हें कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा उत्तीर्ण घोषित किया गया। डॉ. महतो एक साधारण किसान परिवार से हैं इनके माता-पिता काफी संघर्ष करते हुए इन्हें पढ़या है।
डॉ. महतो ने अपनी यह उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, बड़े भाई पूर्ण चन्द्र महतो, परिवार एवं अपने गुरुजनों को दिया।
(संक्षिप्त परिचय)


डॉ. सुभाष चन्द्र महतो का जन्म सन् 1985 ईस्वी को गांव सरगछीड़ा, प्रखण्ड-राजनगर जिला-सरायकेला-खरसावां, झारखंड के एक साधारण किसान परिवार में हुआ है। माता श्रीमती शांति देवी, पिता श्री कालिदास महतो है। डॉ. महतो का प्राथमिक शिक्षा गांव के ही स्कूल में हुआ है, माध्यमिक शिक्षा-राजनगर से तथा उच्च शिक्षा रांची विश्वविद्यालय एवं कोल्हान विश्वविद्यालय से हुआ है। स्नातकोत्तर उत्तीर्ण के पश्चात् राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) में भी उत्तीर्ण है। वर्ष 2015 से ही कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में कुड़मालि भाषा में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं में गहरी रुचि रहने के कारण कुड़माली साहित्य से संदर्भित कुल 6 पुस्तकों का रचना/संपादन कियें हैं। विभिन्न संस्थान जैसे- साहित्य अकादमी (Eastern Regional poetry Festival), आकाशवाणी, विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन में अपनी मातृभाषा कुड़माली में कविता पाठ कर चुकें हैं। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेकों संगोष्ठी में अपना आलेख प्रस्तुत कर चुके हैं। डॉ. महतो का आलेख राज्यकीय, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इन्होनें विभिन्न संस्थान जैसे- अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित कार्यशाला/ भाषा सम्मेलन में आलेख प्रस्तुत कर चुके हैं। कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय संगोष्ठी, राजकीय महोत्सव, वेबीनार एवं अन्य कार्यक्रमों में संयोजक, समन्वयक एवं कार्यकारणी सदस्य के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. महतो को भाषा-साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा एवं माननीय राज्यपाल, झारखंड सरकार द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कियें हैं। वर्ष 2025 कुड़माली भाषा साहित्य के क्षेत्र में Ph.D की उपाधि प्राप्त किये हैं।





