
सरायकेला – सरायकेला स्थित सालडीह गांव में मंगलवार को प्रकृति पर्व करम पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गणेश माहली के आवास पर आयोजित पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस अवसर पर बहनों ने दिनभर उपवास रखकर करम देव की पूजा-अर्चना की।
देर शाम करम डाली को पूजा स्थल पर जावा की टोकरियों के साथ विधि-विधानपूर्वक स्थापित किया गया। जावा की टोकरियों को फूल, सिंदूर एवं रंग-बिरंगे धागों से सजाया गया था। इसके बाद श्रद्धालुओं ने करम राजा की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि तथा भाई-बहनों की लंबी उम्र की कामना की।
माहली ने करम पूजा से जुड़ी करमू और धरमू दो भाइयों की पारंपरिक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि करम वृक्ष शक्ति, युवावस्था, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। करम पूजा और जावा का आयोजन तीन दिनों तक भाई-बहन के अटूट प्रेम, श्रद्धा और उपवास के साथ किया जाता है।
पूजा के दौरान पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। मांदल-नगाड़े की थाप पर माहली ने पूरे परिवार के साथ करम नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में गांव के बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और झामुमो नेताओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
माहली ने कहा कि करम पर्व गांव, राज्य तथा आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का संदेश देता है।




