
राजनगर : रघुनाथ मुर्मू की जयंती के अवसर पर , पूजा अर्चना एवं माल्यार्पण कर धूमधाम से मनाया गया। आज राजनगर बाजार में रघुनाथ मुर्मू की मूर्ति पर माल्यार्पण एवं पूजा अर्चना कर धूमधाम से उनके जयंती मनाया गया। मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक श्रीमान चंपई सोरेन को गाजे बाजे एवं पारंपरिक नृत्य कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने पूजा अर्चना कर रघुनाथ मुर्मू की मूर्तियों पर माल्यार्पण किये, उसके बाद राजनगर चौक पर सिद्धू कानू मूर्तियों पर भी माल्यार्पण किये।


चंपई सोरेन ने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू संताली भाषा के महान लेखक, शिक्षाविद और ओल चिकी लिपि के निर्माता थे। संताली समाज में उन्हें गुरु गोमके के यानी महान गुरु के नाम से जाना जाता है। उनके जन्म 5 मई 1905 दांदबोस गांव मयूरभुज जिला उड़ीसा में हुआ था, उनकी मृत्यु 1 फरवरी 1982 को हुआ। 1925 में उन्होंने संताली भाषा के लिए खुद की लिपि और ओल चिकी बनाई। इसके पहले संताली लोग बांगला , देवनागरी या रोमन लिपि में लिखते थे। चिकी में 30 अक्षर है और यह संताली ध्वनियों के हिसाब से बनाई गई है। भारत सरकार ने 2003 में इसे मान्यता दी। रघुनाथ मुर्मू के कारण ही आज संताली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में जगह मिली। लाखों लोग अपनी लिपि में पढ़ लिख पा रहे हैं। भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया ।



कार्यक्रम को सफल बनाने में विष्णु मुर्मू , सामरम टुडू, सुकलाल टुडू ,चामरू टुडू ,वास्को मुर्मू , टकला मुर्मू , अर्जुन मुर्मू , राजो टुडू , लक्ष्मी मुर्मू , रुक्मणी टुडू , सुकरमनी टुडू , वासन्ती टुडू,अतिथिगण , समाजसेवी एवं ग्रामवासी मौजूद थे।


