
झारखण्ड सरकार अब आपराधिक मामलों में घिरे थाना और ओपी प्रभारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। राज्य पुलिस मुख्यालय स्तर पर ऐसे पुलिस अधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनकी कार्यशैली को लेकर गंभीर शिकायतें लंबित हैं। सूत्रों के अनुसार, ऐसे अधिकारियों को थाना प्रभारी पद से हटाया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक, सरकार और पुलिस मुख्यालय को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई थाना और ओपी प्रभारी विवादों, भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और अनुशासनहीनता के आरोपों में घिरे होने के बावजूद महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए हैं। इसी को देखते हुए अब विभागीय स्तर पर बड़ी समीक्षा शुरू की गई है।


बताया जा रहा है कि जिन थाना प्रभारियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है, उन्हें फील्ड पोस्टिंग से हटाकर लाइन क्लोज अथवा गैर-प्रभावी पदों पर भेजा जा सकता है। पुलिस विभाग इसे पुलिसिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार साफ संदेश देना चाहती है कि कानून लागू कराने वाली एजेंसी में दागी छवि वाले अधिकारियों को संवेदनशील जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। पुलिस महकमे में यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में कई जिलों में थाना स्तर पर बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।



हाल के दिनों में राज्य के कई जिलों से थाना प्रभारियों के खिलाफ शिकायतें सामने आई थीं। कुछ मामलों में अवैध वसूली, जमीन विवाद में हस्तक्षेप और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप भी लगे थे। इन घटनाओं के बाद सरकार पर पुलिस व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। पुलिस मुख्यालय स्तर पर चल रही इस कवायद को लेकर विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे आम जनता के बीच पुलिस की छवि सुधारने में मदद मिलेगी। साथ ही ईमानदार और बेहतर कार्य करने वाले अधिकारियों को आगे बढ़ाने का रास्ता भी साफ होगा।
सरकार की इस संभावित कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। कई जिलों में थाना और ओपी स्तर के अधिकारी अब अपनी कार्यशैली और पुराने मामलों को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।


