
आसंगी गांव में 500 बेड महिला छात्रावास निर्माण का विरोध, जगन्नाथ मंदिर परिसर व तालाब की सुरक्षा की उठाई मांग**


सरायकेला-खरसावां:** गम्हरिया प्रखंड के आसंगी गांव में झारखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (जियाडा) द्वारा प्रस्तावित 500 बेड महिला छात्रावास निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन को आवेदन देकर मांग की है कि जिस भूमि पर छात्रावास बनाने की योजना है, वहां निर्माण कार्य रोकते हुए उसे **जगन्नाथ मंदिर परिसर** और **सार्वजनिक उद्यान (गार्डन)** के रूप में विकसित किया जाए।



ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित भूमि के नीचे लगभग **9 एकड़ का एकमात्र तालाब** है, जो पूरे क्षेत्र के लिए जल का प्रमुख स्रोत है। इसी तालाब में दुर्गा पूजा, काली पूजा, मनसा पूजा, लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा और गणेश पूजा सहित विभिन्न देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। उनका कहना है कि छात्रावास निर्माण से तालाब का अस्तित्व और धार्मिक परंपराएं दोनों प्रभावित होंगी।
आवेदन में बताया गया है कि आसपास के लोगों और पशुओं के लिए गर्मी के दिनों में यही तालाब जल का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि बड़े निर्माण कार्य से जल प्रदूषण बढ़ेगा और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि आसंगी गांव पहले से ही विस्थापन का दंश झेल चुका है। गांव के लोगों ने औद्योगिक और शैक्षणिक विकास के लिए अपनी बड़ी मात्रा में जमीन तत्कालीन एआईएडीए (वर्तमान जियाडा) और तत्कालीन आरआईटी (वर्तमान एनआईटी) को दी थी। ऐसे में यदि जियाडा को छात्रावास के लिए भूमि चाहिए तो उद्योग हेतु अधिग्रहित अन्य उपलब्ध भूखंडों का उपयोग किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र से दूर छात्रावास बनाए जाने से महिला कर्मियों के आवागमन में भी कठिनाई होगी। साथ ही आसंगी गांव में सड़क, नाला और सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बिना ग्रामसभा की सहमति के भूमि का उपयोग न किया जाए तथा प्रस्तावित भूखंड को **जगन्नाथ मंदिर परिसर और हरित क्षेत्र** के रूप में विकसित कर धार्मिक आस्था, पर्यावरण और ग्रामीणों के हितों की रक्षा की जाए।


