
देश में वर्षों से “विकसित भारत”, “आत्मनिर्भर भारत”, “विश्वगुरु भारत” जैसे बड़े-बड़े नारों का प्रचार किया जा रहा है। करोड़ों रुपये विज्ञापनों और इवेंट्स पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी आम जनता अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए घंटों लाइन में खड़ी रहने को मजबूर है। कभी ट्रेन टिकट के लिए मारामारी,कभी पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशानी, कभी गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें, तो कभी रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए संघर्ष यही आज के “विकसित भारत” की वास्तविक तस्वीर बन चुकी है।


आज सरायकेला स्थित गैस गोदाम में जो दृश्य देखने को मिला, उसने सरकार के तमाम दावों की हकीकत जनता के सामने ला दी। भीषण गर्मी में महिलाएं, बुजुर्ग, मजदूर और आम लोग घंटों लाइन में खड़े रहे। कई महिलाएं छोटे बच्चों को गोद में लेकर धूप में इंतजार करती रहीं। अव्यवस्थित वितरण, धीमी प्रक्रिया और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।



जनता की लगातार शिकायतों और परेशानी की सूचना मिलने पर नगर पंचायत अध्यक्ष श्री मनोज कुमार चौधरी स्वयं गैस गोदाम पहुंचे और वहां मौजूद लोगों की समस्याओं को सुना। उन्होंने पूरी व्यवस्था का निरीक्षण कर संबंधित लोगों से बातचीत की तथा आम जनता को राहत पहुंचाने के लिए व्यवस्था को और बेहतर एवं व्यवस्थित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मौके पर उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार हमेशा जनता के सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान एवं आम लोगों को राहत दिलाने हेतु राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री, जिला उपायुक्त एवं अनुमंडल पदाधिकारी स्तर पर भी आवश्यक हस्तक्षेप एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। अध्यक्ष श्री चौधरी की उपस्थिति एवं पहल के बाद गैस आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू करने की दिशा में तत्काल कार्रवाई भी शुरू हुई, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल सकी।
श्री चौधरी ने कहा कि विकसित राष्ट्र केवल भाषण, विज्ञापन और बड़े आयोजनों से नहीं बनते, बल्कि संकट के समय आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं, सरकार की तैयारी और प्रशासनिक व्यवस्था से उनकी वास्तविक स्थिति तय होती है।
उन्होंने कहा कि आज चीन जैसे देश वर्षों पहले से ऊर्जा सुरक्षा, तेल भंडारण, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर चुके हैं। वैश्विक संकट के समय वहां सरकारें पहले जनता की सुविधा और आपूर्ति व्यवस्था को प्राथमिकता देती हैं। जबकि भारत में आम जनता आज भी गैस सिलेंडर और ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए घंटों लाइन में खड़ी रहने को मजबूर है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में देश में रिकॉर्ड जीएसटी वसूली, रिकॉर्ड टैक्स संग्रह और बड़े-बड़े विकास के दावे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी आम जनता को राहत देने वाली मजबूत व्यवस्था दिखाई नहीं देती। रेलवे में लंबी वेटिंग, महंगी शिक्षा, महंगा इलाज, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।
श्री चौधरी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व केवल मंच से भाषण देना नहीं, बल्कि जनता के हर सुख-दुख और कठिन समय में उनके बीच खड़े रहना है। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक को सम्मानपूर्वक, समय पर और बिना परेशानी के मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक केवल नारों से “विकसित भारत” का सपना अधूरा ही रहेगा।
उन्होंने संबंधित विभागों से मांग की कि गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और जनहितकारी बनाया जाए ताकि भविष्य में आम लोगों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।


