
आदित्यपुर : आदित्यपुर स्थित फुटबॉल ग्राउंड में दिन्दली सार्वजनिक टुसू मेला समिति के तत्वावधान में इस वर्ष भी भव्य टुसू मेला का आयोजन पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ किया गया। यह मेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोक-संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा। इस मेले की शुरुआत वर्षों पूर्व स्वर्गीय दीपेन महतो के प्रयास से हुई थी, जो आज भी निरंतर उसी भावना और उद्देश्य के साथ आयोजित होता आ रहा है। आयोजनकर्ता लालटू महतो ने कहा कि “टुसू पर्व हमारी ग्रामीण संस्कृति और पूर्वजों की अमूल्य विरासत है।



इसे संरक्षित रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।” इस अवसर पर स्व. दीपेन महतो की माता ने भावुक होकर कहा कि “मेरे बेटे ने सबसे पहले फुटबॉल ग्राउंड में टुसू मेले की नींव रखी थी। आज उसका छोटा भाई लालटू उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। यह मेरे लिए गर्व और संतोष का विषय है। ईश्वर उसे सदैव आगे बढ़ाए।”



इस वर्ष टुसू मेले की भव्यता और आकर्षण पूर्व वर्षों की तुलना में कहीं अधिक देखने को मिला। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग मेले का आनंद लेने पहुंचे। झूमर गीत, पारंपरिक नृत्य, लोक-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। विभिन्न क्षेत्रों से लाई गई टुसू की मनमोहक प्रतिमाएं दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहीं। मेले में बतौर अतिथि प्रदेश कांग्रेस कमिटी के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचू, जिला परिषद की पूर्व सदस्य सारथी महतो, भाजपा नेता बास्को बेसरा, झामुमो जिलाध्यक्ष भगलू सोरेन एवं विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. जे.एन. दास उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे लोक-संस्कृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। इसके अतिरिक्त गुरजीत सिंह, पूर्व पार्षद राजरानी महतो, जूली महतो, रितेन महतो सहित अनेक गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता रही।
टुसू मेले ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयास, परंपरा और संस्कृति के संरक्षण से ही समाज की पहचान जीवित रहती है।


